हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली प्रीति यादव की कहानी बताती है कि मजबूत इरादे और सही दिशा में की गई मेहनत उम्र और परिस्थितियों की सीमाओं को पार कर सकती है।
एक साधारण परिवार से आने वाली प्रीति के पिता चंद्र मोहन यादव चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल थे। परिवार आर्थिक रूप से बहुत संपन्न नहीं था, लेकिन माता पिता का शिक्षा पर पूरा विश्वास था। प्रीति ने भी पढ़ाई को अपनी ताकत बनाया और बचपन से ही पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखा।
उन्होंने 12वीं कक्षा में 96.2 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल टॉप किया। इसके बाद भूगोल विषय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और इसी दौरान UPSC की तैयारी शुरू कर दी। उनका लक्ष्य साफ था, उन्हें भारतीय पुलिस सेवा का हिस्सा बनना था।
ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने मास्टर डिग्री में दाखिला भी लिया, लेकिन जब महसूस हुआ कि UPSC की तैयारी को पूरी तरह समय देना जरूरी है, तो उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई छोड़कर अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित किया।
उनकी मेहनत रंग लाई। साल 2019 में प्रीति यादव ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास की और AIR 636 हासिल की। महज 22 साल की उम्र में वह IPS अधिकारी बन गईं।
एक हेड कांस्टेबल की बेटी का IPS अधिकारी बनने तक का यह सफर केवल परीक्षा में सफलता की कहानी नहीं है। यह उस विश्वास की कहानी है कि साधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए, तो मंजिल दूर नहीं रहती।
प्रीति यादव की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो छोटी शुरुआत से बड़े सपने देखता है। 🇮🇳✨
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