जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद बिहार के कटिहार की कक्षा 4 की छात्रा लक्ष्मी ने पढ़ाई को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया है। ❤️📚

लक्ष्मी अपने पैरों की उंगलियों से बैग की जिप खोलती हैं, कॉपी के पन्ने पलटती हैं और पैर के अंगूठे व उंगलियों के बीच पेन पकड़कर लिखती हैं। वह स्कूल में अपने साथियों के साथ खेलती हैं और कक्षा में सवालों के जवाब भी देती हैं।

लक्ष्मी के माता-पिता ने समाज की नकारात्मक बातों को नजरअंदाज कर बेटी की पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। उनके पिता रोज उन्हें स्कूल पहुंचाते हैं और शिक्षक भी उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग करते हैं।

लक्ष्मी का सपना आगे चलकर शिक्षिका बनने का है। वह पढ़-लिखकर अपने जैसी दूसरी बेटियों के लिए भी शिक्षा की राह आसान बनाना चाहती हैं।

लक्ष्मी की कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं, बल्कि उस हौसले की कहानी है जो परिस्थितियों को अपनी मंजिल के रास्ते में दीवार नहीं बनने देता। 🌟

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