मधुबनी की धरती पर मिथिला कला ने एक बार फिर अपनी समृद्ध विरासत और अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया। 🎨🇮🇳
108 मीटर लंबे कैनवास पर रामचरितमानस की कथा को पारंपरिक मिथिला पेंटिंग शैली में उकेरा गया। इस विशाल कलाकृति को 180 छात्र-छात्राओं ने मिलकर तैयार किया, जिसे तीन पद्मश्री कलाकारों का मार्गदर्शन मिला।
इसकी खासियत केवल इसका आकार नहीं, बल्कि रामचरितमानस के प्रसंगों और श्लोकों को मिथिला की पारंपरिक चित्रकला के जरिए जीवंत करना है।
यह पहल युवा कलाकारों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी खूबसूरत प्रयास है।
मिथिला की धरती से निकली कला जब विश्व स्तर पर पहचान बनाती है, तो यह सिर्फ कलाकारों की उपलब्धि नहीं होती। यह पूरी सांस्कृतिक विरासत, बिहार और भारत के लिए गर्व का क्षण बन जाती है। ❤️🎨
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