मिलिए उस शख्स से, जिन्होंने भारत को आधुनिक लग्जरी होटल उद्योग की नई पहचान दी। 🏨🇮🇳

15 अगस्त 1898 को जन्मे राय बहादुर मोहन सिंह ओबेरॉय की कहानी संघर्ष से सफलता तक पहुंचने वाले भारतीय उद्यमिता के सबसे प्रेरक सफरों में से एक है।

उनकी शुरुआत बेहद साधारण थी। उन्होंने महज ₹50 की मासिक नौकरी से अपने करियर की शुरुआत की और शिमला के सेसिल होटल में क्लर्क के रूप में काम किया।

लेकिन उनके सपने किसी नौकरी तक सीमित नहीं थे।

मोहन सिंह ओबेरॉय ने होटल उद्योग को करीब से समझा और अपना खुद का व्यवसाय खड़ा करने का फैसला किया। कहा जाता है कि अपना पहला होटल खरीदने के लिए उन्होंने परिवार के गहने तक गिरवी रख दिए।

यहीं से शुरू हुआ वह सफर, जिसने आगे चलकर The Oberoi Group को भारत और दुनिया के प्रतिष्ठित होटल ब्रांड्स में शामिल कर दिया।

उन्होंने भारतीय होटल उद्योग में कई नए प्रयोग किए। महिलाओं को रोजगार के अवसर देने से लेकर आधुनिक होटल सेवाओं और फ्लाइट कैटरिंग जैसे क्षेत्रों में पहल करने तक, उनकी सोच अपने समय से काफी आगे थी।

राय बहादुर मोहन सिंह ओबेरॉय का सपना सिर्फ बड़े होटल बनाना नहीं था। वह चाहते थे कि भारतीय आतिथ्य और भारतीय सेवा की पहचान दुनिया भर में बने।

पद्म भूषण से सम्मानित मोहन सिंह ओबेरॉय ने साबित किया कि शुरुआत कितनी छोटी है, यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि आपका सपना कितना बड़ा है और उसे पूरा करने के लिए आप कितना दृढ़ संकल्प रखते हैं।

₹50 की नौकरी से शुरू हुआ सफर आज एक ऐसी विरासत बन चुका है, जो भारत की मेहमाननवाजी को दुनिया भर में पहचान दिला रही है। 🌍🇮🇳

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